दूत किन्नरी साधना: पूर्ण विधि और महत्व
दूत किन्नरी कौन हैं?
दूत किन्नरी, किन्नरी यक्षिणी, योगिनी और अप्सराओं की तरह अत्यंत सुंदर होती हैं। तंत्र शास्त्रों में इनकी साधना और उपासना प्राचीन काल से चली आ रही है। ये सौम्य (नरम, शांतिपूर्ण) और उग्र (क्रोधपूर्ण, शक्तिशाली) दोनों रूपों में पूजी जाती हैं।
यदि दूत किन्नरी नाराज हो जाती हैं, तो वे साधक को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकती हैं – जैसे मानसिक परेशानी, आर्थिक हानि या अन्य कष्ट। लेकिन यदि वे प्रसन्न हो जाती हैं, तो साधक को अपार धन-धान्य, समृद्धि और सुख प्रदान करती हैं। वे मालामाल कर देती हैं, अर्थात् धन, वैभव और इच्छापूर्ति का खजाना खोल देती हैं।
दूत किन्नरी की गति तीनों कालों में होती है – भूत (अतीत), वर्तमान और भविष्य। यानी वे समय की किसी भी सीमा से बंधी नहीं हैं। ये हर सवाल का सटीक और सच्चा जवाब दे सकती हैं, और देते भी हैं। विशेष रूप से काल ज्ञान (भविष्य की घटनाओं, समय संबंधी रहस्यों) के लिए किन्नरियों में दूत किन्नरी सबसे अव्वल नंबर पर है। वे भविष्यवाणी, भूत-प्रेत बाधा निवारण और गुप्त ज्ञान प्रदान करने में निपुण हैं।
महत्वपूर्ण सावधानी: इनसे हमेशा सही, आवश्यक और शुभ सवाल ही पूछें। व्यर्थ, गलत या स्वार्थी सवाल न पूछें, वरना ये नाराज हो जाती हैं और नुकसान पहुंचा सकती हैं। साधना के बाद केवल जरूरी, सकारात्मक प्रश्न ही करें।
साधना कब और कैसे करें?
यह साधना वर्ष में केवल एक दिन – निर्जला एकादशी के दिन ही की जाती है। निर्जला एकादशी का अर्थ है पूरे दिन जल (पानी) ग्रहण न करना, पूर्ण उपवास। इस एक दिन की साधना ही पूर्ण रूप से सिद्ध हो जाती है। साधना रात 10 बजे के बाद कभी भी शुरू कर सकते हैं। रात का समय ही सबसे उपयुक्त है, क्योंकि तांत्रिक ऊर्जा तब चरम पर होती है।
साधना की अवधि: रात में जाप पूरा होने तक (लगभग 2-3 घंटे), उसके बाद उसी कमरे में सोना।
साधना की पूर्ण विधि: चरणबद्ध तरीके से
साधना सरल है, लेकिन पूर्ण निष्ठा और विश्वास से करें। नए साधक भी चिंता न करें – यह सौम्य साधना है, जिसमें कोई डर या भय नहीं होता। फिर भी, यदि चाहें तो घेरा (रक्षा चक्र) लगा सकते हैं। नीचे हर चरण विस्तार से:
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शुद्धिकरण और आसन:
साधना शुरू करने से पहले स्नान करें। पूर्ण रूप से नहा-धोकर शुद्ध हो जाएं। सफेद कपड़े पहनें (सौम्यता के प्रतीक के रूप में)। पूर्व मुख होकर बैठें। सफेद आसन (सफेद कपड़ा या आसन) पर विराजें। सफेद रंग शुद्धता और किन्नरी की सौम्यता को आकर्षित करता है। -
गुरु आदि का पूजन:
सबसे पहले गुरु, गणेश, इष्ट, कुल देव, पितर, शिव और पार्वती का पूजन करें। प्रत्येक का पंचोपचार पूजन दें – अर्थात् (1) आसन, (2) पाद्य, (3) अचमन, (4) स्नान, (5) वस्त्र। सिंदूर, फूल, चंदन आदि से पूजन करें। सभी से आज्ञा लें – मन ही मन कहें: "मुझे दूत किन्नरी साधना की आज्ञा दें।" यह तांत्रिक परंपरा का आधार है। -
दूत किन्नरी का आवाहन:
सफेद आसन पर ही दूत किन्नरी का आवाहन करें। आसन पर ताजे पुष्प बिछा या डाल दें। गुलाब का इत्र लगाएं (इत्र आसन को सुगंधित बनाता है, जो किन्नरी को प्रसन्न करता है)। -
भोग और दीप-धूप:
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भोग: लाल मिठाई (लाल रंग उग्र रूप को संतुलित करता है) और मोती चूर के लड्डू चढ़ाएं। ये भोग मीठे और शुद्ध होने चाहिए।
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घी का दीपक जलाएं (दीपक प्रकाश और शक्ति का प्रतीक)।
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अगरबत्ती लगाएं (सुगंध आकर्षण बढ़ाती है)।
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मंत्र जाप:
लाल चंदन की माला, या स्फटिक की माला, या रुद्राक्ष की माला लें। माला पर चंदन और इत्र लगाएं। अब मंत्र का इक्कीस माला जाप करें (21 मालाएं = 21 x 108 = 2268 जाप)। जाप पूर्व मुख, सफेद आसन पर ही करें। जाप धीरे-धीरे, स्पष्ट उच्चारण से करें। एकाग्रचित्त रहें। -
प्रत्यक्ष दर्शन और वचन बद्ध:
जाप के दौरान दूत किन्नरी प्रत्यक्ष प्रकट होंगी। उनके आगमन पर वचन लें – स्पष्ट स्वर में कहें:
"मैं जब बुलाऊं, तू हाजिर होना। जो पूछूं, सच-सच बताना।"
यह वचन अनिवार्य है, ताकि वे आज्ञाकारी बनें और सवालों के सच्चे उत्तर दें। -
साधना समापन और विश्राम:
जाप पूरा होने के बाद उसी कमरे में सो जाएं। जाप के दौरान कोई अनुभव या आभास (जैसे ठंडक, सुगंध, दर्शन या कंपन) हो सकता है – बिल्कुल न डरें। जाप जारी रखें। यह सौम्य साधना है, इसलिए कोई भय या खतरा नहीं। यदि मन में भय हो, तो पहले घेरा (रक्षा मंडल) बना लें – आसन के चारों ओर चंदन या कुमकुम से गोला बनाएं।
साधना के बाद के नियम
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सिद्धि के बाद दूत किन्नरी जब बुलाएं, तुरंत हाजिर होंगी।
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केवल सही, जरूरी सवाल पूछें – जैसे काल ज्ञान, भविष्य, समस्या समाधान।
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नियमित रूप से प्रसन्न रखें – भोग, पूजन से।
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नाराज न करने के लिए अनैतिक सवाल न पूछें।
यह साधना एक बार करने पर ही स्थायी सिद्धि देती है। नए साधक ध्यान दें: पूर्ण विश्वास रखें, शुद्धता बनाए रखें। दंतकाली तंत्र शक्ति साधना संस्थान की शुभकामनाएं!

