विपरीत प्रतंगिरा अन्जाने सत्रु से छुटकारा के लिए
विपरीत प्रतंगिरा प्रयोग एक अत्यंत शक्तिशाली और गोपनीय तांत्रिक विधि है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब शत्रु का पता न हो या शत्रु ने कोई बहुत बड़ी शक्ति भेज रखी हो। इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य किसी भी बड़ी शक्ति को काटकर उसे वापस भेजना होता है, जिससे वह शक्ति उसी पर प्रभाव डालती है जिसने उसे भेजा है।
विपरीत प्रतंगिरा प्रयोग की विशेषताएँ:
1. शत्रु की पहचान न होने पर उपयोग: जब शत्रु का पता न हो या उसने कोई बड़ी शक्ति भेज रखी हो, तब इस प्रयोग का उपयोग किया जाता है।
2. बड़ी शक्तियों को रोकना: यह प्रयोग बगलामुखी, नरसिंह जैसी बड़ी शक्तियों को रोकने और वापस भेजने के लिए किया जाता है।
3. प्रभावी और गोपनीय: यह प्रयोग अत्यंत प्रभावी है और इसे गोपनीय रखने की सलाह दी जाती है।
सावधानियाँ:
1. नए साधकों के लिए नहीं: नए साधकों को यह प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि देवी की शक्ति को संभालना मुश्किल हो सकता है।
2. शारीरिक और मानसिक प्रभाव: इस प्रयोग के दौरान शरीर में कंपन, बुखार, तेज दर्द, पसीना, और गर्मी बढ़ सकती है। क्रोध भी बढ़ सकता है।
3. विशेष आहार और आचरण: साधना के दौरान सात्विक भोजन करें, दूध अधिक पिएं, मन शांत रखें, मौन व्रत रखें, और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
सफलता के लिए नियम:
1. सात्विक भोजन: प्याज और लहसुन का सेवन बंद करें।
2. बगलामुखी की पूजा: इस प्रयोग के साथ बगलामुखी की पूजा भी करें, जिससे प्रयोग की शक्ति बढ़ जाती है।
3. सोच-समझ कर करें: इस प्रयोग को सोच-समझ कर करें, क्योंकि शक्ति के वापस लौटने पर उसका प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है और जान का खतरा हो सकता है।
विपरीत प्रतंगिरा प्रयोग तंत्र शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे सही विधि से करने पर शत्रु का बचना असंभव हो जाता है। इस प्रयोग को करते समय सभी नियमों का पालन करना आवश्यक है ताकि साधना सफल हो और किसी प्रकार की हानि न हो।

